Tax in Hindi | Types of Tax in India

आज हम Tax के बारे में पढ़ेंगे | अगर आप सरकार को Tax देते हो या नहीं भी देते हो, अभी आप छोटे हो | आपको ये ज़रूर जानना चाहिए की India में Taxation की basic Concept क्या है| आज नहीं तो कल आप भी Tax दोगे |

What is Tax ? | Tax in Hindi

देश चलाने के लिए हम सरकार को जो पैसे देते है, उसी को Tax कहते है|

Tax हम क्यों देते है ??

हो सकता है की, आप किसी बड़े शहर में रहते होंगे | आपके पास सारे Facilities होंगे, 24 hours Electricity, Water, Roads, Hospital, School……etc. पर गांव के लोगों के पास इन सारी Facilities नहीं है| उनकी Income इतनी कम है की कुछ Saving नहीं हो पाता है| वो खुद के दम पर इन सारी चीज़ों का arrangement नहीं कर सकते |

क्या आप नहीं चाहते की at-least गांव के लोगों तक जो Life की basic necessity है वो पहुंचे | जैसे की – Roads, Hospital, School, Electricity, Water ….. etc.

अगर हम  Tax नहीं देंगे तो आमिर और आमिर हो जायेंगे और गरीब, और गरीब हो जायेंगे |

Government को ही हम Tax क्यों देते है ?

किसी भी देश के लोगों की ज़िम्मेदारी उस देश के सरकार के कंधो में होती है| तभी सरकार बनते है| अपने देश के लोग खुश रहे, उनको कोई तकलीफ न हो इन सब चीज़ों की ज़िम्मेदारी सरकार की है|

सरकार ही है जो आपके तक Road, Hospital, School, Electricity या और भी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाई गी | इन सब चीज़े बनवाने के लिए सरकार को चाहिए बहुत सारे पैसे | पर, सरकार के पास कोई Source of Income तो नहीं है, तो पैसे कहाँ से आएंगे ?

कुछ लोग बोलेंगे सरकार के पास तो पैसे छापने की Machine है| वो जितनी मर्ज़ी उतनी छाप सकते है|

ऐसा नहीं होता है| सरकार जितनी मर्ज़ी उतने पैसे नहीं छाप सकते | अगर ऐसा हुआ तो हमारे Currency की Value और गिर जाएगी |

तो ऐसे में सरकार आम लोगों से पैसा लेती है| Tax के रूप में | जिससे की वो अपने देश के लोगों के लिए भलाई कर सके |

Government Spy

सरकार को Tax लेने का हक़ किसने दिया ?

Constitution का नाम तो आपने सुना होगा | जिसे हम Rule Book of India कहते है| देश Constitution से चलता है| कोई भी कुछ भी बोल देगा और वह लागु नहीं हो जाएगा | Constitution में लिखा हुआ है सरकार बनेगी तभी सरकार बनते है| इस देश में जितने भी कानून है सभी Constitution में लिखे गए है| तभी Follow होते है|

वैसे ही, Constitution का Article 265 कहता है की बिना किसी Law के कोई भी किसी से Tax नहीं Collect कर सकता | आपको कोई Authority नहीं है|

Law बनाने की Authority किसके पास है ?

Constitution of India का Article 246 के Seventh Schedule में तीन List दिए गए है|

  • Union List
  • State List
  • Concurrent List

Union List में जो भी चीज़ दिए हुए है, उनसे related Law बनाने का हक़ सिर्फ Parliament को दिया गया है| वैसे ही,

State List में जो भी चीज़ mention है उनसे related, Law बनाने का हक़ सिर्फ State Legislature को है| और,

Concurrent List के Case में State Legislature और Parliament दोनों को हक़ है Law बनाने का |

Union List के Entry no. 82 में Income Tax की बात की गयी है| मतलब Income Tax से related law बनाने का हक़ सिर्फ Parliament के पास है| और ये भी लिखा हुआ है की Agricultural Income में Tax नहीं लगा सकते |

Types of Tax

सरकार हमसे दो तरह से Tax वसूलती है|

  • Direct Tax
  • Indirect Tax

Direct Tax vs Indirect Tax

DIRECT TAX INDIRECT TAX
Levied on Income of a Person.

आपके income में जो Tax सरकार लगाती है उसको हम Direct Tax कहते है|

Levied on Price of Goods and Services.

अगर आप कोई सामान खरीद रहे हो या Service provide कर रहे हो | उसमे जो Tax लगेगा, वो Indirect Tax है|

Burden of Tax Cannot be Shifted to Others.

 

 

Direct Tax का बोझ आप किसी दूसरे के उप्पर थोप नहीं सकते | अगर आपको भरना है तो आप ही भरोगे |

Burden of Tax can be Shifted to Others.

Indirect Tax को आप किसी दुसरो के उप्पर थोप सकते हो |

Ex :-

एक Toy Company है| वो अपना सामान Wholesaler को बेचती है 18% GST के साथ | Wholesaler, Retailer को बेचती है 18% GST के साथ | और फिर Retailer, Consumer को बेचती है 18% GST के साथ |

यहां पर Tax का Burden Shift हो रहा है|

Progressive in Nature.

जैसे जैसे आपके Income बढ़ेंगे | आपको Tax भी ज़्यादा देना होगा |

Regressive in Nature.

Income भरने पर भी Tax Same रहेगा |

Ex :-

एक गरीब आदमी 10 रुपया का सामान खरीदता है और एक आमिर आदमी भी उस 10 रुपया का सामान खरीदता है| दोनों को same Tax भरना होगा |

Ex- Income Tax Ex- GST/Custom Duty

Components of Income Tax Law

1. Income Tax Act, 1961 :-

1961 में तो ये आ गया था पर 1st April 1962 से लोगों ने इसे Follow किया | इसने Total 298 Sections और 14 Schedules है|

2. Annual Finance Act :-

  • Annual word इसलिए Add हुआ है क्यूंकि ये हर साल इसमें कुछ न कुछ Change होते रहता है|
  • Finance Act, Parliament के दोनों Houses (Lok Sabha & Rajya Sabha) से pass होने के बाद President के पास आता है| अगर President ने Sign कर दिया तो Act बन जाता है|
  • Finance Act से बहुत सारे Act Amend किये जाते है, सिर्फ income Tax Act नहीं |

Finance Act का First Schedule में 4 Parts दिए गए है :-

  • Part -1 :- Rates for Previous Year
  • Part -2 :- TDS Rates.
  • Part -3 :- Rates for current Previous Year.
  • Part -4 :- Rules for Computing Net Agricultural Income.

3. Income Tax Act Rules, 1962 :-

  • CBDT (Central Board of Direct Tax) को Power है की अगर Income Tax act का law सही से Follow नहीं हो रहा है तो उसके Against आप Rules बना सकते हो |
  • पर धयान रहे किसी भी Act को Overrule नहीं करना चाहिए और न ही उसका Effect को |

Act और Rules में Difference

  • अगर किसी Act में कुछ Amend करना चाहते हो | तो उसके लिए एक नया Act बनाना पड़ता है, उसके लिए Bill Pas करना होता |
  • कोई भी Act को Law बनाने के लिए पहले उसे Lok Sabha में Pass करना होगा, फिर Rajya Sabha में जाएगा | अगर Rajya Sabha में भी Pass हो गया तब President के पास जाएगा | और President का Sign के बाद वो Act Law बन जाएगा | इसमें काफी Time जाता है|
  • और Rule बनाने के लिए CBDT को बस एक Government की site है उसमे Notification डालना होता है|
  • Act, Rule से हमेशा उप्पर है|

4. Circular/Notification :-

  • Circulars CBDT issue करता है| किसी Assessee या Officers को किसी Problems से deal करने के लिए या किसी provision से related doubt Clear करने के लिए |
  • Notification निकालने का काम Central Government का है| बहुत सारे Sections ऐसे है जिसमे सरकार ने Clear बात नहीं कही है| उस Section को effect देने के लिए सरकार Notification निकलती है|
  • Circulars को Assessee मानने से इंकार कर सकता है और वह इसके लिए Court जा सकता है| पर, Notification सभी को मानना ही है| आप Court नहीं जा सकते |
  • Circular Law नहीं होता पर Notification Law होता है|

5. Legal decisions of Courts :-

As a Assessee अगर आपको लगता है Income Tax department आपसे ज़्यादा Tax मांग रहे है| आपके साथ कुछ गलत हो रहा है| तो आप अपनी जान बचाने यहां जा सकते हो :-

  • CIT (Appeal)
  • ITAT (Income Tax Appeal Tribunal)
  • HC (High Court)
  • SC (Supreme Court)

Clause और Sub-Section में Difference

Section 10 आपने देखा होगा | इस Section के अंदर और भी छोटे छोटे Section आते है| जैसे की Section 10(1), Section 10(2), Section 10(3)…..etc.

अगर Section10(1), Section 10(2), Section 10(3), Section 10 में Depend नहीं करते है| मतलब Section10(1) या Section 10(2) जानने के लिए Section 10 का जानना ज़रूरी नहीं है, तो हम Section 10(1) को Section 10 Clause 1 पढ़ेंगे |

अगर ये आपस में Dependent होते है तो Clause के जगह पर Sub-section पढ़ते |


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>> Income Tax Act Section 10 – ये Income में सरकार भी Tax नहीं मांगती | 

>> Income Tax Act Section 24 – Home Loan बिना Interest के | 

>> Section 54 of Income Tax Act – Capital Gains पर कोई Tax नहीं देना होगा | 

>> Income Tax Act Section 80D – Health Insurance में पाओ Tax Deduction. 

>> Section 80C of Income Tax Act – 1.5 लाख तक का Investment में कोई Tax नहीं | 

>> Income Tax Act Section 44AD – Presumptive taxation

>> Section 56 of Income Tax Act- Gift Tax in India

>> Section 44AB of Income Tax Act – Tax Audit

>> Section 194j of Income Tax – TDS

>> Section 87a of income tax act- 12500 तक का Tax Rebate.

>> Section 80DDB of Income Tax Act- 1,00,000 तक का maximum Deduction 

>> Seventh proviso to section 139(1) Income Tax Act

>> Section 269SS, 269T, 269ST of Income Tax Act.

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